Jhilmil | झिलमिल

Hindi Hasya Kavi Sammelan


An evening filled with laughter and Hindi poetry

झिलमिल

हिंदी भाषा का जो स्वरुप कविताओं में उजागर होता है वह अत्यंत आनंद प्रदान करने वाला होता है. सधे हुए कवि सम्मेलनों में प्रस्तुतिकरण के कौशल द्वारा कविताओं की मिठास में चार चाँद लग जाते हैं. यदि बात हास्य कविताओं की हो रही हो तो फिर मिठास और आनंद का एक नाभकीय विस्फोट होता है. सियैटल नगरी में 'झिलमिल २०१३ - हास्य कवि सम्मलेन' का आयोजन १९ अक्तूबर २०१३ को होने जा रहा है. प्रतिध्वनि की ओर से प्रस्तुत इस कार्यक्रम में आपको सुनने को मिलेंगी अनेक चटपटी बातें और झिलमिलाती हुई हास्य कविताएं. पिछले तीन वर्षों के समान, इस वर्ष भी सियैटल के स्थानीय कवि अापके मनोरंजन के लिए मंच पर चढ़ेंगे ही, साथ ही न्यू जर्ज़ी और पोर्टलैंड से भी कावि अामंत्रित हैं । मंच संचालन की लगाम संभालेंगे हमारे अपने श्री अभिनव शुक्ल.


आमंत्रित कविगण

रजनी तथा अनूप भार्गव

अमेरिका के हिंदी साहित्य जगत के लिए रजनी तथा अनूप भार्गव का नाम अंजाना नहीं है। रजनी जी की कविताओं में मानव मन की संवेदनाओं का सूक्ष्मता से अवलोकन होता है। हिंदी विदेश प्रसार सम्मान से सम्मानित अनूप जी जब अपनी छोटी छोटी रचनाओं में बड़ी बड़ी बातें करते हैं तो मुख से अनायास ही वाह फूट पड़ता है। इन दोनों को मंच से काव्य पाठ करते हुए सुनना अपने आप में एक साहित्यिक अनुभव से गुज़रने जैसा है।



इंद्र अवस्थी

पोर्टलैंड में हिंदी संगम की स्थापना करने वाले इंद्र अवस्थी को लेखन की विरासत अपने पिता, सुप्रसिद्ध कवि श्री अरुण प्रकाश अवस्थी से प्राप्त हुयी है। कोलकाता में जन्में तथा इलहाबाद में पढ़े इंद्र नें दोनों नगरों की मिठास को अपनी रचनाओं में समेट लिया है। इंद्र के व्यंग्य अनेक पत्रिकाओं में प्रकाशित और प्रशंसित हो चुके हैं।


मंच संचालक

अभिनव शुक्ल

सियैटल नगरी वर्षा की रिमझिम फुहारों के संग अभिनव शुक्ल के काव्य की रस धारों से भी भली भांति परिचित है। अभिनव शुक्ल काव्य मंचों पर अपने गुदगुदाते घनाक्षरी छंदों के लिए पहचाने जाते हैं। अपने आस पास घटने वाली घटनाओं से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बड़ी बेबाकी से कसे उनके व्यंग्य बाण किसी पत्थर का भी दिल आर पार करने की क्षमता रखते हैं।




स्थानीय कविगण

अंकुर गुप्ता

अंकुर कोई लेखक इत्यादि नहीं, पेशे से हैं साधारण से अभियंता,
विचारों को जोड़ तोड़ कर लिख देने से कोई कवि तो नहीं बनता,
फिर भी हिंदी सम्बंधित आयोजन हो तो करते अवश्य प्रयास है,
जो मिल जाए आपका प्रोत्साहन, तो छू लिया मानो आकाश है,
मातृभाषा से जुड़े रहने का यह मानो एक अद्भुत सा एहसास है|



धीरज मेहता

धीरज पिछले तीन वर्षों से सियैटल में हैं, और इन तीन वर्षों में उन्होंने प्रतिध्वनि के अनेक कार्यक्रमों में भाग लिया है। वे कविता और टेनिस के शौकीन हैं। अपने खाली समय में धीरज 'क्राय' संस्था को स्वयंसेवक के रूप में योगदान देते हैं।







पंकज राजवंशी

बचपन से ही लिखने का और कार्टून बनाने का शौक रहा है पंकज को. पत्र पत्रिकाओं में कुछ छपते भी थे लेकिन मेडिकल की पढाई में यह शौक पीछे छूट गया. लिखना मगर छोड़ा नहीं. किसी मंच पर कविता पढने के यह पहला मौका है







अनु गर्ग

लेखक एवं वक्ता अनु गर्ग कंप्यूटर विज्ञान की उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका आये लेकिन विभिन्न भाषाओँ की तरफ इनका रुझान इतना बढ़ा कि इसके लिए इन्होने अपना सॉफ्टवेर का कैरिएर भी छोड़ दिया. इनकी शब्दों के मूल से सम्बंधित तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.






फ़राह सैय्यद

फ़राह मूल रूप से कहानीकार हैं पर उनकी कविताओं में भी संवेदना के स्तर पर अनेक मर्मस्पर्शी प्रयोग देखने को मिलते हैं। फ़राह को हज़ारों शेर कंठस्थ हैं तथा कब, कहाँ, कौन सी पंक्तियाँ मन को गुदगुदाती हैं इसका अच्छा भान है।







संतोष खरे

संतोष सीयैटल में होने वाले सभी हिंदी के कार्यक्रमों में रूचि रखते हैं और एक उत्साही श्रोता हैं! पिछले कुछ वर्षो से कुंडली विधा में छंद रचने के सफल असफल प्रयास करते आयें हैं और इन्ही कुछ प्रयासों को झिलमिल में उतारने के लिए आतुर हैं।




How Much

$15 General admission ($18 at gate)
$12 Pratidhwani members ($15 at gate)
$10 Full time students ($12 at gate)

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When

Date: Oct 19, 2013

Day: Saturday

Time: 5:00 pm

Where

Woodland Park Zoo Education Center Auditorium,
750 N. 50th St.,
Seattle, WA 98103
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