Jhilmil | झिलमिल

Hindi Hasya Kavi Sammelan


An evening filled with laughter and Hindi poetry

झिलमिल

हिंदी भाषा का जो स्वरुप कविताओं में उजागर होता है वह अत्यंत आनंद प्रदान करने वाला होता है. सधे हुए कवि सम्मेलनों में प्रस्तुतिकरण के कौशल द्वारा कविताओं की मिठास में चार चाँद लग जाते हैं. यदि बात हास्य कविताओं की हो रही हो तो फिर मिठास और आनंद का एक नाभकीय विस्फोट होता है. सियैटल नगरी में 'झिलमिल २०१२ - हास्य कवि सम्मलेन' का आयोजन २७ मई २०१२ को होने जा रहा है. प्रतिध्वनि की ओर से प्रस्तुत इस कार्यक्रम में आपको सुनने को मिलेंगी अनेक चटपटी बातें और झिलमिलाती हुई हास्य कविताएं. पिछले दो वर्षों के समान, इस वर्ष भी सियैटल के स्थानीय कवि अापके मनोरंजन के लिए मंच पर चढ़ेंगे ही, पर इस वर्ष हम भारत से अामंत्रित कवियों को सुनने के लिए विशेष रूप से उत्साहित हैं। मंच संचालन की लगाम संभालेंगे हमारे अपने श्री अभिनव शुक्ल.


आमंत्रित कविगण

महेश दुबे

महेश दुबे का नाम हिंदी हास्य कविता की दुनिया के लिए अंजाना नहीं है. महेश दुबे मुंबई में रहते हैं. 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' तथा 'हास्य कवि मुकाबला' सहित अनेक अवसरों पर उन्होंने अपनी कविताओं से टेलिविज़न के दर्शकों को गुदगुदाया है. महेश में अपने अनुभवों से हास्य को निचोड़ लेने की अद्भुत प्रतिभा है. उनका काव्य पाठ सुनते समय श्रोता लोट पोट हो जाते हैं.









वागीश दिनकर

"युग की सुप्त शिराओं में कविता शोणित भारती है, वह समाज मर जाता है जिसकी कविता डरती है." डॉ वागीश दिनकर की यह पंक्तियाँ कवि और कविता दोनों को दिशा दिखाने का कार्य करती हैं. पिलखुआ (गाज़ियाबाद) के रहने वाले डॉ दिनकर एक कालेज में संस्कृत के विभागाध्यक्ष हैं. डॉ दिनकर की रचनायें अपने अन्दर भारतीयता की खुशबू समेटे हुए होती हैं. उनको मंच से काव्य पाठ करते हुए सुनना अपने आप में एक साहित्यिक अनुभव से गुज़रने जैसा है.


मंच संचालक

अभिनव शुक्ल

अभिनव शुक्ल काव्य मंचों पर अपने गुदगुदाते घनाक्षरी छंदों के लिए पहचाने जाते हैं. अपने आस पास घटने वाली घटनाओं से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बड़ी बेबाकी से कसे उनके व्यंग्य बाण किसी पत्थर का भी दिल आर पार करने की क्षमता रखते हैं.




स्थानीय कविगण

अंकुर गुप्ता

अंकुर कोई लेखक इत्यादि नहीं, पेशे से हैं साधारण से अभियंता,
विचारों को जोड़ तोड़ कर लिख देने से कोई कवि तो नहीं बनता,
फिर भी हिंदी सम्बंधित आयोजन हो तो करते अवश्य प्रयास है,
जो मिल जाए आपका प्रोत्साहन, तो छू लिया मानो आकाश है,
मातृभाषा से जुड़े रहने का यह मानो एक अद्भुत सा एहसास है|



निहित कौल

निहित कौल सीयटल के निवासी है और जब उन्हे अपने माइक्रोसॉफ़्ट के काम से फुर्सत मिलती है तो वह हिन्दी व उर्दू में कविताएँ और गीत लिखना पसंद करते हैं| वह संगीत में भी रुची रखते हैं और अपनी रचनाओं को लय में ढालने का प्रयास करते हैं|



राहुल उपाध्याय

राहुल उपाध्याय पिछले अनेक वर्षों से कविता लेखन में सक्रीय हैं. वे अपने निवास पर नियमित काव्य गोष्ठियों का आयोजन भी करते हैं. उनकी कविताओं में सामान्यतः एक ऐसी अंतर्दृष्टि देखने को मिलती है जो विषय वास्तु को नए आयाम प्रदान करती है.






एम उपेन्द्र

आंध्र-ऋषि पुरुस्कार से सम्मानित उपेन्द्र मूलतः व्यंग्य लेखक हैं. उनके तीन व्यंग्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनके लेखों एवं रचनाओं का प्रसारण आकाशवाणी तथा दूरदर्शन पर होता रहता है. ३५ वर्षों तक अर्थशास्त्र के प्राध्यापक रहने का बाद अब वे 'हिंदी लेखक संघ' के कार्यदर्शी का दायित्व निभा रहे हैं.






How Much

$15 General admission ($18 at gate)
$12 Pratidhwani members ($15 at gate)
$10 Full time students ($12 at gate)

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When

Date: May 27, 2012

Day: Sunday

Time: 5:00 pm

Where

Eastside Baha'i Center,
16007 NE 8th St,
Bellevue, WA 98008
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