Jhilmil | झिलमिल

Hindi Hasya Kavi Sammelan


An evening filled with laughter and Hindi poetry

झिलमिल

हिंदी भाषा का जो स्वरुप कविताओं में उजागर होता है वह अत्यंत आनंद प्रदान करने वाला होता है. सधे हुए कवि सम्मेलनों में प्रस्तुतिकरण के कौशल द्वारा कविताओं की मिठास में चार चाँद लग जाते हैं. यदि बात हास्य कविताओं की हो रही हो तो फिर मिठास और आनंद का एक नाभकीय विस्फोट होता है. सिएटल नगरी में इस सदी के प्रथम हास्य कवि सम्मलेन का आयोजन २६ जून २०१० को होने जा रहा है. प्रतिध्वनि की ओर से प्रस्तुत इस कार्यक्रम में आपको सुनने को मिलेंगी अनेक चटपटी बातें और झिलमिलाती हुई हास्य कविताएं.


आमंत्रित कविगण

डॉ. बिन्देश्वरी अग्रवाल

डॉ. बिन्देश्वरी अग्रवाल का नाम हिंदी काव्य जगत की उन चुनिन्दा कवयित्रियों में लिया जाता है जिन्होंने हास्य कविताओं को एक नयी परिभाषा प्रदान करी है. अपने प्रवास के अनुभवों को वे बड़ी सहजता से हास्य में परिवर्तित किया करती हैं. उनकी बोली और सहज रचनाओं में लाखों श्रोताओं नें घंटों गोते लगाये हैं. वे न्यूयार्क विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाती हैं तथा विश्व हिंदी समिति के साथ पिछले अनेक वर्षों से सक्रिय रूप में जुड़ी हुई हैं.

रेनू 'राजवंशी' गुप्ता

रेनू 'राजवंशी' गुप्ता ने अमेरिका में बसे भारतीयों का जीवन निकट से देखा है, उसे जिया है। सिनसिनाटी में रहते हुए रेनू ने जागरण में नियमित स्तम्भ लिखे हैं. रेनू जी की कवितायेँ हास्य से परे जीवन दर्शन दिखलाती हैं. उनके दो कविता संग्रह "प्रवासी-स्वर" एवं "प्रवासी-मन" एवं दो कहानी संग्रह "कौन कितना निकट" एवं "जीवन लीला" प्रकाशित हुए हैं.


स्थानीय कविगण

अभिनव शुक्ल

अभिनव शुक्ल काव्य मंचों पर अपने गुदगुदाते घनाक्षरी छंदों के लिए पहचाने जाते हैं. अपने आस पास घटने वाली घटनाओं से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बड़ी बेबाकी से कसे उनके व्यंग्य बाण किसी पत्थर का भी दिल आर पार करने की क्षमता रखते हैं.


अगस्त्य कोहली

अगस्त्य कोहली के अभिनय और निर्देशन से नगरी के लोग भली भांति परिचित हैं. इस कार्यक्रम में आपको अगस्त्य के भीतर छिपे व्यंगकार से मिलने का अवसर भी मिलेगा.



अंकुर गुप्ता

अंकुर गुप्ता सिएटल मंच पर अभिनेता कि तरह तो कई बार आये, परन्तु मंच पर आने का उनका लालच है कि बस बढता ही जाए|तो इस बार वे हास्य कविताएं प्रस्तुत करेंगे अपनी मातृभाषा में, व्यंग्य के साथ कुछ सन्देश भी छूटे, बस इसी चीज़ कि आशा में|




अनु गर्ग

लेखक एवं वक्ता अनु गर्ग कंप्यूटर विज्ञान की उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका आये लेकिन विभिन्न भाषाओँ की तरफ इनका रुझान इतना बढ़ा कि इसके लिए इन्होने अपना सॉफ्टवेर का कैरिएर भी छोड़ दिया. इनकी शब्दों के मूल से सम्बंधित तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.

निहित कौल

निहित कौल सीयटल के निवासी है और जब उन्हे अपने माइक्रोसॉफ़्ट के काम से फुर्सत मिलती है तो वह कविताएँ और गीत लिखना पसंद करते हैं| वह संगीत में भी रुची रखते हैं और अपनी रचनाओं को लय में ढालने का प्रयास करते हैं|


How Much

$15 General admission ($18 at gate)
$12 Pratidhwani members ($15 at gate)
$10 Full time students ($12 at gate)

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When

Date: June 26th, 2010

Day: Saturday

Time: 6 pm

Where

Brechemin Auditorium,
Music Building,
University of Washington,
Seattle, WA 98195
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