Jhilmil | झिलमिल

Hindi Hasya Kavi Sammelan


An evening filled with laughter and Hindi poetry

झिलमिल

पिछले वर्ष सियैटल में हुए कवि सम्मलेन को मिली आशातीत सफलता को देखते हुए नगरी की सांस्कृतिक संस्था प्रतिध्वनि इस वर्ष पुनः हास्य कवि सम्मलेन का आयोजन कर रही है. हिंदी भाषा का जो स्वरुप कविताओं में उजागर होता है वह अत्यंत आनंद प्रदान करने वाला होता है. सधे हुए कवि सम्मेलनों में प्रस्तुतिकरण के कौशल द्वारा कविताओं की मिठास में चार चाँद लग जाते हैं. यदि बात हास्य कविताओं की हो रही हो तो फिर मिठास और आनंद का एक नाभकीय विस्फोट होता है. सियैटल नगरी में 'झिलमिल २०११ - हास्य कवि सम्मलेन' का आयोजन १७ सितम्बर २०११ को होने जा रहा है. प्रतिध्वनि की ओर से प्रस्तुत इस कार्यक्रम में आपको सुनने को मिलेंगी अनेक चटपटी बातें और झिलमिलाती हुई हास्य कविताएं.


आमंत्रित कविगण

अर्चना पंडा

अर्चना पंडा बे-एरिया अमेरिका की एक सुविख्यात कवयित्री हैं. अर्चना भारत से अभियांत्रिकी तथा प्रबंधन की शिक्षा ग्रहण कर १९९९ में अमेरिका आयीं. वे एक सॉफ्टवेर इंजीनियर है एवं सिलिकन वैली में वेब डेवलपर का काम करती हैं. परन्तु मूल रूप से अर्चना एक कलाकार हैं. कविता के साथ इनकी गहरी रूचि गायन , वादन, नृत्य, भाषा एवं साहित्य में भी है. भारत से अमेरिका आई प्रवासी नारी के मन की उथल पुथल को अर्चना ने अपनी कविताओं में एक सशक्त अभिव्यक्ति दी है. अर्चना की कविताएं आपको हंसायेंगी भी तथा अपने भीतर झांक कर देखने के लिए प्रेरित भी करेंगी.

आचार्य श्रीनाथ प्रसाद द्विवेदी

उत्तरी अमेरिका के श्रेष्ठ गीतकारों में आचार्य द्विवेदी का नाम प्रथम पंक्ति में आता है. सरी, कनाडा में रहने वाले आचार्य द्विवेदी हिंदी भाषा तथा भारतीय संस्कृति के सच्चे साधक हैं. आचार्य जी के अनेक काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं तथा उन्होंने अनेक संकलनों का संपादन भी किया है. आचार्य जी के गीतों की स्वर लहरी में एक ऐसी मिठास है जो हमें इस भगदड़ भरी दिनचर्या से कहीं दूर ले जाती है. आचार्य जी की कविताएं आपको हिंदी भाषा तथा साहित्य के उस गरिमामयी दौर की याद दिलायेंगी जब काव्य मंच बच्चन तथा दिनकर जैसे कवियों की आभा से चकाचौंध था.


स्थानीय कविगण

अभिनव शुक्ल

अभिनव शुक्ल काव्य मंचों पर अपने गुदगुदाते घनाक्षरी छंदों के लिए पहचाने जाते हैं. अपने आस पास घटने वाली घटनाओं से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बड़ी बेबाकी से कसे उनके व्यंग्य बाण किसी पत्थर का भी दिल आर पार करने की क्षमता रखते हैं.



अंकुर गुप्ता

अंकुर कोई लेखक इत्यादि नहीं, पेशे से हैं साधारण से अभियंता,
विचारों को जोड़ तोड़ कर लिख देने से कोई कवि तो नहीं बनता,
फिर भी हिंदी सम्बंधित आयोजन हो तो करते अवश्य प्रयास है,
जो मिल जाए आपका प्रोत्साहन, तो छू लिया मानो आकाश है,
मातृभाषा से जुड़े रहने का यह मानो एक अद्भुत सा एहसास है|



निहित कौल

निहित कौल सीयटल के निवासी है और जब उन्हे अपने माइक्रोसॉफ़्ट के काम से फुर्सत मिलती है तो वह हिन्दी व उर्दू में कविताएँ और गीत लिखना पसंद करते हैं| वह संगीत में भी रुची रखते हैं और अपनी रचनाओं को लय में ढालने का प्रयास करते हैं|


ज्योति राज

ज्योति राज पेशे से तो सोफटवेयर इंजीनीयर हैं, पर शौकिया - शब्दों की तुकबंदी के माध्यम से भावों की अभिव्यक्ति में रुची रखती हैं. ये अंगरेज़ी, हिंदी, उरदु एवम पंजाबी में भी लिखती हैं. इनकी पहली काव्य कोशिश १३ साल की आयु में प्रकाशित हुइ. जयोति के विचार में, शायरी वह है - जिसके ज़रिए दिल के जज़बात हिजाब के दायरों से बाहर आते हैं, कहने वाले हज़ार लफ्ज़ों में जो ब्यान नहीं कर पाते, वही कुछ अज़ीम शायर दो पंक्तियों में कह जाते हैं.

कृष्णन कोलाड़ी

कृष्णन कोलाड़ी अपने आप को कोई हिंदी के पंडित नहीं मानते. पर मुंबई में पले-बढ़े, कृष्णन, खुद को बम्बइया हिंदी के उस्ताद ज़रूर मानते है. इसलिए उनकी कविताओं में भारी भरकम भाषा का प्रयोग कम ही होता है. बस सरल सी भाषा और एक अच्छा सा ख्याल, यह सुनकर उनको हमेशा आनन्द मिलता है. वह उम्मीद करते है के झिलमिल के प्रेक्षकों को उनकी कविताएँ पसंद आएँगी और इस मंच के बाकी माननीय कविगणों से उनको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.


How Much

$15 General admission ($18 at gate)
$12 Pratidhwani members ($15 at gate)
$10 Full time students ($12 at gate)

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When

Date: September 17, 2011

Day: Saturday

Time: 5:30 pm

Where

Eastside Baha'i Center,
16007 NE 8th St,
Bellevue, WA 98008
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